यह 21वीं सदी का सच है!
पहले सच कड़वा होता था, अब डराने लगा है। डराने वाला सच कड़वे सच से कहीं अधिक खतरनाक होता है। कड़वे सच में हमारा चरित्र ही पतित होता है, लेकिन डरावने सच में तो हमारा जीवन ही संकट में पड़ जाता है। कड़वे सच में अब तक यह संभावना बनी हुई थी कि 'कुछ सच' होता...
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अंशुमाली रस्तोगी
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[23 Jul 2009 01:47 AM]



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