बस आनंद लें बड़े और महान साहित्यकारों के लड़ाई-झगड़े का
मुझे साहित्य की गंभीरता से कहीं ज्यादा साहित्यकारों के झगड़े-टंटे में दिलचस्पी है। बड़े और महान साहित्यकार जब आपस में लड़ते-झगड़ते हैं, तो दिल और दिमाग को अजीब-सा सुख मिलता है। सारी थकान मिट जाती है। सिर का दर्द पलभर में गायब हो जाता है। सच कहूं तो...
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अंशुमाली रस्तोगी
व्यंग्य
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[27 Jul 2009 03:53 AM]



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