हमें भ्रष्टाचार से नहीं, ईमानदार से ज्यादा खतरा है
भ्रष्टाचार हमारी परंपरा है। हमारी संस्कृति है। हमारी आदत है। हमारा व्यवहार है। हमारे रहने व जीने का ढंग है। बेशक हम भ्रष्टाचार में अकंठ डूबे हुए हैं, पर जिंदा हैं। भ्रष्टाचार हमें सहज बनाता है। हम हर कहीं भ्रष्टाचार में संलिप्त रहते हैं, पर हमारे चेहरे...
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अंशुमाली रस्तोगी
व्यंग्य
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[06 Aug 2009 03:28 AM]



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