’तुम जो कह दो तो आज की रात चाँद डूबेगा नहीं’, कमीने संगीत समीक्षा.

आवारा हूँ ... मैं झमाझम बारिश से भीगती बस में था. यह शाम का वही वक़्त था जिसके लिये एक गीतों भरी प्रेम कहानी में कभी गुलज़ार ने लिखा था कि सूरज डूबते डूबते गरम कोयले की तरह डूब गया… और बुझ गया! गुड़गांव से थोड़ा पहले महिपालपुर क्रॉसिंग पर जहाँ मेट्रो की नई बनी लाइन... [पूरी पोस्ट]
writer मिहिर

musicगुलज़ारअकेलापननया सिनेमा

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[07 Aug 2009 15:03 PM]

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