बदहवास शहर में फंसी जिन्दगियों की कहानी : कमीने

आवारा हूँ ... उस शाम सराय में रविकांत और मैं मुम्बई की पहचान पर ही तो भिड़े थे. ’मुम्बई की आत्मा महानगरीय है लेकिन दिल्ली की नहीं’ कहकर मैंने एक सच्चे दिल्लीवाले को उकसा दिया था शायद. ’और इसी महानगरीय आत्मा वाले शहर में शिवसेना से लेकर मनसे तक के मराठी मानुस वाले... [पूरी पोस्ट]
writer मिहिर

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[20 Aug 2009 16:44 PM]

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