Chay Baithkee

Chay Baithkee मौत नहीं है हल सपनो का,माना टूटा बल अपनों का.फिर भी हम मर जाएँ कैसे,खुद की लाश जलायें कैसे?सपनो के टूटे पंखों से,अपनों के विरह मनको से.नीड़ भला सजायें कैसे,सोते न जग जाएँ कैसे?फिर भी उसकी किसी छवि को,उसके नयनो के अमित रवि को,खुद में हम झुठलायें कैसे?कैसे... [पूरी पोस्ट]
writer Amlendu Tripathi
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[24 Aug 2009 11:10 AM]

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