कुछ तैरती पतवारें, कुछ डूबती नौकाएं...

और जाओ... जला कर राख कर दो वैशाली को इस आग में.... रायबरेली के फिरोज भाई बड़े दिलदार इंसान हैं। वे गालिब से लेकर माईकेल जेक्सन तक की बात करते हैं। हाल ही में उन्होने एक हिंदी का एक गजल सुनायी। ये गजल इलाहाबाद में रहनेवाले उनके एक मित्र एहतेराम इस्लाम ने लिखी थी जिसे मैं अपने ब्लाग पर बांटने का लोभ नहीं... [पूरी पोस्ट]
writer sushant jha
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[24 Sep 2009 09:47 AM]

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