तुम्‍हारा शुक्रवार

वैतागवाड़ी तुमने कहा था कि तुम पेड़ इसलिए नहीं होकि तुमने कभी पत्‍ते नहीं पहनेफिर भी मैं तुम्‍हारी छांव में बैठाऔर तुम्‍हारे पत्तों से ढंका अंधेरा देखामैं तुम्‍हारी तस्वीर कभी नहीं बना सकताकुछ आकार मैंने इससे पहले कभी नहीं जानेइतने ज़्यादा कोण मिल जाएं तो सिर्फ़... [पूरी पोस्ट]
writer Geet Chaturvedi

कविता

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[26 Jul 2009 17:06 PM]

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