'आभासी रिश्ते' और 'तदबीर से बिगड़ी हुई तक़दीर'
वास्तविक जीवन में यूँ तो हर रिश्ते की अपनी एक पहचान होती है उनकी एक नज़ाकत होती है ,अधिकार और अपेक्षाओं से लदे भी होते हैं .एक कहावत भी है 'जो पास है वह ख़ास है'.यथार्थ से जुड़े और जोड़ने वाले इन रिश्तों से परे होते हैं -कुछ और भी सम्बन्ध !जो होते हैं कुछ...
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अल्पना वर्मा
अल्पना वर्मा
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[20 Nov 2009 17:39 PM]



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