सिन्दूरी सिंगार..

swati : रेगिस्तान में पड़ रही है बर्फ सुबह की बाहों में लिपटी हुई मैं हर करवट पर मुस्काती बिखरे बालों में तुम्हारे ही पोर पाती सारा आकाश जड़ जाता तुम्हारे ही शब्दों से उन्ही शब्दों के पार हाथों में हाथ लिए भोर को नींद से जगाती ओस छिड़क कर पत्तों पर पेड़ों से नीरा छलकाती औ दूर उस छोटे मन्दिर... [पूरी पोस्ट]
writer swati
views
8
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[21 Aug 2009 16:17 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix