वह एक आवारा कुत्ता था।
मैं तहसील के बाहर पत्थर पर बैठा इंतजार कर रहा था। वह मंथर गति से शाही चाल चलता हुआ मेरे पास आया। अपनी पनीली आँखों से मुझे देखने लगा मानो कह रहा हो'कुछ खिलाना-वाना है तो बोलो। नहीं तो मैं चलता हूँ।'मुझे उसका यह एटिच्यूड भा गया। मुझे भी भूख लग ही रही थी।...
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मथुरा कलौनी
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[07 Aug 2009 04:39 AM]



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