बेवफाई हर तरफ़....!

डॉ. चन्द्रकुमार जैन बेहयाई बेवफाई बेईमानी हर तरफ़धीरे धीरे मर रहा आँखों का पानी हर तरफ़फ़िर भी कुछ दिखता नहीं जबकी उजाला ख़ूब हैरौशनी सी तीरगी की तर्जुमानी हर तरफ़मुल्क तो दिखता नहीं है मुल्क में यारों कहींदिख रही लेकिन है उसकी राजधानी हर तरफ़किसको-किसको रोइएगा और क्या-क्या... [पूरी पोस्ट]
writer Dr. Chandra Kumar Jain
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[25 Aug 2009 09:53 AM]

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