है आसमान किसके लिए...?
नहीं ज़हान तो फ़िर बागबान किसके लिएमैं ज़िंदगी की लिखूं दास्तान किसके लिएमैं पूछता रहा हर एक बंद खिड़की सेखड़ा हुआ है ये खाली मकान किसके लिएगरीब लोग इसे ओढ़ते-बिछाते हैंतू ये न पूछ कि है आसमान किसके लिएहरेक शख्स मेरा दोस्त है यहाँ लोगोंमैं सोचता हूँ कि...
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Dr. Chandra Kumar Jain
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[02 Sep 2009 23:43 PM]



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