अपना कार्टून....!

डॉ. चन्द्रकुमार जैन अपना कार्टून देखते हुएउसे याद आयायह उसका कल शाम साढ़े चार बजे वाला चेहरा हैउस वक़्त एक जन सभा को संबोधित करते हुएउसकी आँखें एक लोमड़ी की तरहचमक रही थींऔर जब उसने कहा, 'प्यारे भाइयों'तब उसकी जीभ काफी बाहरनिकल आयी थीजिसे देख पाया सिर्फ़ एक कार्टूनिस्टजनसभा को... [पूरी पोस्ट]
writer Dr. Chandra Kumar Jain
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[05 Sep 2009 01:11 AM]

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