ऐसे-वैसों को मुँह मत लगाया करो...!
उँगलियों से यूँ न सब उठाया करोखर्च करने से पहले कमाया करो ज़िंदगी क्या है ख़ुद ही समझ जाओगेबारिशों में पतंगें उड़ाया करो दोस्तों से मुलाक़ात के नाम पर नीम की पत्तियों को चबाया करो शाम के बाद जब तुम सहर देख लोकुछ फ़कीरों को खाना खिलाया करोअपने सीने में दो गज...
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Dr. Chandra Kumar Jain
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[16 Sep 2009 23:55 PM]



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