ये नदी कैसे पार की जाए....!

डॉ. चन्द्रकुमार जैन दोस्ती जब किसी से की जाएदुश्मनों की भी राय ली जाएमौत का ज़हर है फिज़ाओं मेंअब कहाँ जा के साँस ली जाएबस इसी सोच में हूँ डूबा हुआये नदी कैसे पार की जाएमेरे माज़ी के ज़ख्म भरने लगेआज फ़िर कोई भूल की जाएबोतलें खोल के तो पी बरसोंआज दिल खोल के भी पी... [पूरी पोस्ट]
writer Dr. Chandra Kumar Jain
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[19 Sep 2009 05:47 AM]

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