हम वो नहीं हैं जिन्हें रास्ता चलाता है...!
समन्दरों में मुआफिक हवा चलाता हैजहाज ख़ुद नहीं चलते ख़ुदा चलाता हैये जा के मील के पत्थर पे कोई लिख आएवो हम नहीं हैं जिन्हें रास्ता चलाता हैवो पाँच वक़्त नज़र आता है नमाज़ों में मगर सुना है कि शब को जुआ चलाता हैये लोग पाँव नहीं जेहन से अपाहिज हैं उधर चलेंगे...
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Dr. Chandra Kumar Jain
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[20 Sep 2009 10:46 AM]



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