किसने बोला क़ज़ा से ड़रते हैं

इक शायर अंजाना सा... किसने बोला क़ज़ा से ड़रते हैं हम तो तेरी वफ़ा से ड़रते हैं दुश्मनों का तो हम को ड़र ही नहीं दोस्तों की दुआ से ड़रते हैं इश्क़ होने का हमको ख़ौफ़ नहीं हम तो बस इंतेहा से ड़रते हैं किसी इन्सान से घबराएं क्यों वो के जो बस ख़ुदा से ड़रते हैं आप से प्यार है... [पूरी पोस्ट]
writer Rohit Jain

मेरी गज़लें20092009 a poetic journeyaug-2009

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[08 Aug 2009 03:57 AM]

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