हो रहा है जो भी कुछ,इसको ऐसे तो नही होना था। हाल ऐ दिल!
आज फिर कुछ सालों के बाद,फिर वहीँ खड़ा हूँ उसी दोराहे पर,फिर सोच रहा हूँ कहाँ जाऊँ,आज खड़ा इस दोराहे पर,हो रहा है जो भी कुछ,इसको ऐसे तो नही होना था!हूँ बेचारा आज फिर,हूँ लाचार सा,देखता हूँ सबको आते जाते,मगर ख़ुद हूँ बीमार सा,जाने इंतज़ार है मुझे किस बात...
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nadeem
कुछ मेरी डायरी से
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[18 Sep 2009 05:35 AM]



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