उसका सुख मेरे सुख से बड़ा कैसे?

जिरह यह है मणिराम। हिंदी में एमए पास का दावा करनेवाले इस रिक्शेवाले से मेरी मुलाकात तकरीबन 10 दिन पहले हुई थी। पिछले शनिवार को नवभारत टाइम्स के कॉलम 'आंखों देखी' में इसे जगह मिली। हालांकि आज जब मैं इसे अपने ब्लॉग पर पब्लिश कर रहा हूं, तीखी धूप को कल रात हुई... [पूरी पोस्ट]
writer अनुराग अन्वेषी
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[28 Jul 2009 13:16 PM]

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