निजीपन में सेंध यानी सच का सामना
उमेश चतुर्वेदीकड़वी सचाई का सामना बहादुर ही कर पाते हैं। बचपन से ही हमें ये बताया जाता रहा है। ये शिक्षा हमें देते वक्त इस बात की भी ताकीद की जाती रही है कि जब तक उस सचाई के उजागर होने से व्यापक समुदाय का हित न जुड़ा हो, चाहे कितना भी कड़वी हकीकत क्यों...
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उमेश चतुर्वेदी
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[29 Jul 2009 10:26 AM]



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