ओ नंगे !!!
ओ नंगे ! हां तुम…… तुम नंगे,
अरे! फिर भी पढ़े जा रहे हो तुम अभद्र
नहीं मानोगे क्या तुम ?
तो सुनो तुम मनुष्य निर्वस्त्र !
तुम नग्न हो क्योंकि निर्लज्ज,
कह तो दिया, निर्लज्ज हो तुम,
मनुष्यों का अनादर करने में
दम्भी, आनन्द पाते हो तुम ।
रखो हृदय...
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Grey Rainbow - स्याह इंद्रधनुष
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[23 Aug 2009 03:35 AM]



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