जगजीत सिंह - चित्रा सिंह की चुनिन्दा - अविस्मरणीय गज़लें
बात निकलेगी तो फिर दूर तलक जायेगी ग़म बढ़े आते हैं कातिल की निगाहों की तरह तुम छुपा लो ऐ दोस्त गुनाहों की तरह किसी रंजिश को हवा दो कि मैं जिन्दा हूँ अभी आये हैं समझाने लोग...
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चित्रा
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[03 Aug 2009 11:21 AM]



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