सच का फैसला झूठे लोग न करें
भारतीय समाज एक मर्यादाशील समाज है । विदेशों की नकल पर और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के इशारे पर परोसे जाने वाली झूठन को जितनी जल्दी समेट लिया जाए उतना अच्छा है । सच का सामना कार्यक्रम विकृत मानसिकता का परिचायक है । एंकर का बयान खुद बताता है कि उसे सिर्फ...
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Atul CHATURVEDI
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[26 Jul 2009 03:28 AM]



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