हिल्ले पठनीयता बहाने जन्मदिन
फ़िलहाल कुछ नहीं लिखने का मन था । अब तो एक धड़का और लग गया है, पठनीयता का ! भला बताइये, आपका निट्ठल्ला अपने टैग को सार्थक करने कहाँ जाये ? मेरी पठनीयता बिन सोचे ही आती है ! इधर उधर से पोस्ट उधार ले लेकर अच्छा ख़ासा...
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डा. अमर कुमार
चिट्ठाचर्चा संदर्भ
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[29 Aug 2009 15:57 PM]



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