फिर - फिर यह कविताई !

कर्मनाशा चलो अब सो जाओ रे भाई !असरा - पसरा है सन्नाटा देखो रात अधियाई।चिड़िया - चरगुन सोय रहे हैं सोयें कुकुर -बिलाई।पर तुम जाग - जागकर भैया करते कौन कमाई ?उजले कागज को काला कर लिखते कौन लिखाई ?जिसको तुम कविता कहते हो वह तो तुकम - तुकाई।जग है , स्याना मारे , ताना... [पूरी पोस्ट]
writer sidheshwer

कविता

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[11 Dec 2009 21:08 PM]

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