सहकारिता को सियासत का श्राप- 1

क़ासिद आधुनिक अर्थशास्त्रियों को तो ख़ैर ये बात बहुत देर में समझ में आई, लेकिन भारतीय वेदों में सह अस्तित्व की बात शुरू से मान्य रही है। ओम् सह नानवतु, सह नौ भुनक्तु, सह वीर्यम करवावहै का ज़िक्र हो या फिर सर्वे भवन्तु सुखिन:, सर्वे सन्तु निरामयाः , सर्वे... [पूरी पोस्ट]
writer पंकज शुक्ल

महाराष्ट्र

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[25 Jul 2009 05:47 AM]

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