...अपने-अपने भगवान!
चलो हम भी गढ़ लेंअपने भगवान और अपना अलग धर्महम भी ढूंढ़ लें...खुद में कोई खूबी और गढ़ लेंअपनी अलग दुनिया!लेकिन इसके लिए चाहिएकरोड़ों रूपये, ढेर सारा संगमरमरऔर कई कोस धरतीऔर ऊपर से जनता का धनखर्च करने का माद्दा भी...चलो इसके लिए खड़ा करेंकोई सामाजिक...
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Sundip Kumar Singh
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[11 Sep 2009 13:19 PM]



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