मँहगाई
आज के इस वक्त में हमेंहमें कपडा, रोटी और मकान से ज्यादाऔर भी कुछ चाहियेपर मँहगाई के उतार चढाव के इस दौर मेंकुछ ज्यादा मिलने की उम्मीद हमें नहीं हैहैरान परेशान होने के दिन अब लद गये हैहमने मान लिया है रुपया हमारा बाप हैऔर हमनें उसकी गुलामी स्वीकार कर ली...
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vipin-choudhary
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[30 Aug 2009 00:09 AM]



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