संस्कार है हिन्दी ।
सूर-मीरा के पदों की झंकार है हिन्दी । देश का स्वाभिमान है,संस्कार है हिन्दी । यह दिवस सप्ताह मास की अवधि है बहुत कम बरसों नहीं ,सदियों का व्यवहार है हिन्दी। -रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु'जीवन एक कला है । साहित्य उसी का सहज मार्ग है । सम्पूर्ण विश्व सुखी हो...
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सहज साहित्य
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[15 Sep 2009 12:35 PM]



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