अपने अपने कैनवस पर

DIL KI  BAT शुक्रवार .....रात नौ बजे .... वे हमेशा की तरह किताबो में धंसे हुए है ...अपने चश्मे को ठीक करके मुझे देख मुस्कराते है ... वे पिता के उन मित्रो में से है जो मुझे बेहद पसंद हूँ...उसका एक कारण उनकी लाइब्रेरी का कलेक्शन भी है ..यूँ भी जब आप बचपन ओर... [पूरी पोस्ट]
writer डॉ .अनुराग

अनजाने लोग

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[11 Nov 2009 00:56 AM]

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