एना कते दिन (कथा) - सतीश चन्द्र झा

कतेक रास बात - श्री सतीश चन्द्र झास्वच्छ आ निर्मल आँखिमे जेना नोर झिलमिलाए लगैत छैक अथवा ओसक बुन्न फूल पर चमकऽ लगैत छै, तहिना ओकर ठोरो पर मुस्की नुका नञि सकैत छलैक। कखनहु कोनो बात हो कोनो प्रसंग हो ओकर मुस्की सुहागिनक लाल-लाल सिन्दुर सँभरल सोउँथ जकाँ हरदम चमकैत रहैत... [पूरी पोस्ट]
writer सम्पादक: कतेक रास बात
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[18 Aug 2009 02:49 AM]

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