LOVE STORY # 392: फ़ोन पर तैरती हुयी आवाज़ असल की आवाज़ से अलग होती

अखाड़े का उदास मुगदर बहुत सारे अँधेरे खामोश में बीच एक शब्द जैसे एक झील में उछाला हुआ कंकर और डूबने से पहले फिर फिर उछलता हुआ. उस अँधेरे खामोश में आवाज़ का अपना अमूर्त था, अपना जादू, अपना यथार्थ. दूरी की खाई को लांघती हुयी, माइकलएंजेलो की पेंटिंग में बढ़ी हुयी उंगली की तरह. एक... [पूरी पोस्ट]
writer आस्तीन का अजगर
views
5
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[23 Sep 2009 06:23 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix