फिर भी कविता लिख लेता हूँ...

आपका पन्‍ना सुबह से लेकर रात तक... भागती रहती है जिंदगी ..कभी इस खबर.. कभी उस खबर... इनके बीच मै बेखबर सा होकर घूमता रहता हूँ...बदबूदार राजनीति... नालियों में सड़ती नवजात बेटियाँ.. सेलेब्रेटियों के पाखंड..चौराहे पर एक कट चाय पीकर... फिर भी कविता लिख लेता... [पूरी पोस्ट]
writer अनिल पाण्डेय

अंकित श्रीवास्तव

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[29 Jul 2009 04:39 AM]

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