मौसम 6 सितम्बर 2009
काँच की खिड़कियों के पार दुकानों ,मकानों,घास और बगीचों पर एक ही रफ़्तार में मुसलसल गिर रही है बारिशदो दिनों सेबेहिसाब... हवा न जाने किस तर्ज़ पर काट रही है चक्कर गोल-गोल भेदती हुई दुछ्त्ती के परदे खड़खड़ाती गैरेज की छत… कुछ-कुछ देर में खिड़की से झाँकते हम खबर...
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पारूल
मेरे फ़ितूर
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[19 Nov 2009 01:31 AM]



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