बच्चों की देख-भाल से आजाद हैं लोग, इस आजादी से बचाओ रे राम
बच्चों की देख-भाल से आजाद हैं लोग इस आजादी से बचाओ रे राम। कैसे आजादी के चक्कर में सारे जग के आँखों के तारे हो गए हैं बेचारे ।बढ़ती महँगाई और तेज रफ्तार जिन्दगी की रेस में जी रही महानगरों की ज्यादातर आबादी यह तो सोच रही है कि उसे क्या कुछ पाना जैसे ढेरों...
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आभा
लालन-पालन से आजादी
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[08 Aug 2009 17:26 PM]



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