यार जुलाहे : गुलज़ार की नज़्म के दो रूप ।

यूनुस खान का हिंदी ब्‍लॉग : रेडियो वाणी 'रेडियोवाणी' पर मैंने पहले भी गुलज़ार, विशाल भारद्वाज और सुरेश वाडकर के अलबम 'बूढ़े पहाड़ों पर' की चर्चा की थी । लेकिन तब 'सुनवाने' की उन तकनीकों का ज्ञान नहीं था, जिनका प्रयोग अब 'रेडियोवाणी' पर अब किया जाता है । बहरहाल पिछले कुछ दिनों से भूपिंदर-मिताली... [पूरी पोस्ट]
writer yunus

chand parosa hai

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[26 Jul 2009 22:33 PM]

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