आखिर कब तक टालेंगे पुलिस सुधार ?

संजीवनी आखिर कब तक टालेंगे पुलिस सुधार ?जम्मू कश्मीर के शापियाँ बलात्कार और हत्या मामले चीख-चीख कर कह रहे हैं कि जिस विभाग पर जनता की सुरक्षा की जिम्मेदारी है, वही अगर उसके अधिकारों का भक्षक बन जाए तो उनके विरुद्ध जाँच की कोई निष्पक्ष संस्था नहीं है.उसी पुलिस के... [पूरी पोस्ट]
writer विनय ओझा 'स्नेहिल'

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[20 Aug 2009 00:59 AM]

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