जागो-जागो बचालो वतन साथियों
जागो जागो बचालो वतन साथियों,लुटता माली के हाथों चमन सथियों ।जिनके पुरखों ने सींचा लहू से चमन,जिनके हक के लिए बाँधा सिर पर कफन;उनकी संतानें यूँ धन की प्यासी हुईं-कर रहीं हैं गबन पर गबन सथियों॥त्याग बलिदान अब तो किताबों में है,हर कोई मस्त अपने हिसाबों में...
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विनय ओझा 'स्नेहिल'
व्यंग्यगीत
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[08 Oct 2009 03:54 AM]



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