फरमानों का हाईटाइड

उम्मीद है तालिबानी कहें या तुकलकी...शब्द कम पड़ जाएंगे। पानी पी पी कर कोसेगें तो थक जाएंगे। गोत्र के चक्कर में उलझे तो यकीन मानिये सर घूम जाएगा लेकिन समझना मुमकिन नहीं हो पाएगा। फिर भी सवाल यही है कि आखिर गोत्र के नाम पर किसी का कत्ल कैसे किया जा सकता है। मसला वोट... [पूरी पोस्ट]
writer सुबोध
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[24 Jul 2009 03:48 AM]

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