चाँद के बाहुपाश में सूरज

जो देखा भूलने से पहले : सूरज-चाँद के बिना धरती पर जो जीवन है जिसे हम जीवन कहते हैं वह असंभव है, दोनों का अदभुद तालमेल है, उनकी जुगलबंदी में धरती पर जीवन को लय मिलती.(सूर्यग्रहण 22 जुलाई09 6.26 प्रातः)आर्यभट्ट (476 ईस्वी) ने सूर्य ग्रहण को लेकर एक श्लोक की रचना की थी-'छादयति... [पूरी पोस्ट]
writer मोहन राणा - Mohan Rana
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[23 Jul 2009 12:46 PM]

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