कल परसों कि आज

जो देखा भूलने से पहले मेज पर सामान पड़ा है, कतरनें,पुरानी होती रसीदें और चुपके से जमा होती धूल.इतने दिन हो गए कि हर रोज.मैंने डाकिये से कहा होने वाली है बारिशसड़क के दूसरी ओर ही रहना वरना भीग जाओगे.अब इस गीली चिठ्ठी को कहाँ रखूँ © मोहन राणा... [पूरी पोस्ट]
writer मोहन राणा - Mohan Rana
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[31 Jul 2009 09:42 AM]

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