जीना केहिं बिधि होय

विनय पत्रिका घर में कैद हैंपिछले कई महीनों से बड़ी मुश्किल में हूँ। घर परिवार के अलावा भोजन और भटकन के आस-पास जीवन का रस जुटा था। वहाँ भी सेंध लग गई है। मिठाई खाता रहा हूँ लेकिन जब से नकली मावा और खोया बड़े पैमाने पर पकड़े गये मिठाइयों का स्वाद कम हो गया। बेसन के... [पूरी पोस्ट]
writer बोधिसत्व

बेमन का जीना

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[12 Aug 2009 14:27 PM]

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