मेरी खिड़की वाली दुनिया
मेरी खिड़की से जो दुनिया दिखती है -वो गोल नहीं है.उसका आकार अनियमित सा है.(समय के संदर्भ में)एक वक्त ये सपाट सी जमीन बन जाती है,दूर तक जिसका विस्तार होता हैऔर अगले ही क्षण सिमट कर रह जाती हैजिसे देख सकना भी दुश्वार होता है.मेरी खिड़की वाली दुनिया में...
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विकास कुमार
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[03 Sep 2009 13:32 PM]



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