असुर जाति

मेरी कलम से लगातार एक हजार वर्षों तक सतत युद्घ के कारण युद्घ करना ही असुर जाति का पेशा बन गया और वे स्वयं क्रूर एवं अत्याचारी हो गए। जिन नगरों को उन्होंने जीता, उनका क्वचित् नागरिक ही सामूहिक हत्याकांड से बच पाया। प्रमुख लोगों के हाथ-पैर, नाक-कान काटकर, आँखें फोड़कर... [पूरी पोस्ट]
writer Krishna Virendra Trust: कृष्णा वीरेन्द्र न्यास
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[22 Aug 2009 23:37 PM]

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