जाने हमने हाय इसका क्या बिगाड़ा......!
बेहिसाब बारिशतिस पर निर्दयी जाड़ाजाने हमने हायइसका क्या बिगाड़ाइस कदर बरसा ये बादलभीग गयी रूह पूरीनिचुड़ गया रोम-रोमउठ गयी है यूँ फरुरीडरते कांपते ही बीतापिछला पूरा ही पखवाड़ादेखना एक दिन हीपूरा हमें डूब जाना हैकुछ नहीं जायेगा संगसब यहीं छूट जाना हैदे रहा...
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Vedika
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[18 Nov 2009 07:54 AM]



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