अंतरतम में तुम.....!
अंतरतम में तुम ....!ज्वाला बन के जले लावा बन के गले अंतरतम में तुम.....!कुछ कहा अनकहाहमने तुमने सहा और जो शेष रहा सपन धूसर धुले अंतरतम में तुम.....!हुयी मूक मन वानीजो अब तक न निजानीन हमने हार मानीन तुमने जीत जानीकैसे मिलते गलेअंतरतम में तुम.....!वे मन के...
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Vedika
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[19 Nov 2009 10:15 AM]



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