क्‍या बात करें ?

प्रत्यक्षा किससे बात करें ? क्‍या बात करें ? गालों पर पेंसिल टिकाये सोचते हुए चेहरे दीखते हैं , सोच की घरघराती मशीन का वाजिब प्रॉडक्‍ट क्‍या है, हाथ नहीं आता । हाथ आता है, स्‍वाति ? स्‍वाति मेरी तरफ देख रही है, दीखता है, वाकई सुन पा रही है ऐसा नहीं लगता । लंच के... [पूरी पोस्ट]
writer Pratyaksha
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[31 Jul 2009 04:03 AM]

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