गली के पीछे

प्रत्यक्षा कौन सा पुराना बाजा बजता है , पता नहीं पर रात बीतते नस पर चढ़ता है दर्द , और कोई धीमे से पूछता है , डर तो नहीं लग रहा ? तिरती खामोशी में खुद की साँस का शोर बेशर्म बेढपपने में छूटता गिरता है । एक सुबुक सिसकी दम तोड़ती है , हँसी फुसफुसाती है दबी शैतानी में और... [पूरी पोस्ट]
writer Pratyaksha
views
11
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[21 Aug 2009 12:42 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix