बरसात की एक रात ..द स्टेज इज़ सेट फॉर द क्राइम

प्रत्यक्षा कुहासा झम झम गिर रहा था । जाड़े के सर्द दिनों में बारिश का तीसरा अवसाद भरा दिन था । दिन के बाद रात अचक्के नकाबपोश सी आई थी। सड़क वीरान थी। घरों की खिड़कियाँ बन्द थीं , पर्दे गिरे थे । अँधेरे में लैम्पपोस्ट से लटका एक पीला फीका गोला धीरे धीरे हिल रहा था ।... [पूरी पोस्ट]
writer Pratyaksha
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[25 Aug 2009 04:01 AM]

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